
पहले 15 दिन ज़मीनी जाँच, रणनीति और तैयारी होती है; तब तक कुछ भी पब्लिक नहीं। Day 16 से सारी सेवाएँ तय रूटीन पर चलती हैं। हर चरण के अंत में जाँच होती है, जैसे नींव जाँचकर ही दीवार उठती है।
आपका एक ही संपर्क: प्रोजेक्ट हेड। रणनीति पर आपकी लिखित मंज़ूरी ज़रूरी है। आपकी ओर से बयान, आपके चेहरे या आवाज़ वाली चीज़ें और जोखिम वाला काम आपकी हाँ से। रोज़ की पोस्ट, जैसे त्योहार की बधाई, टीम और क्वालिटी जाँच से पास होती है।
Day 1 यानी जिस दिन ज़रूरी लॉगिन और काग़ज़ हमें मिलें। E-day यानी मतदान का दिन। E-30 यानी मतदान से 30 दिन पहले; E+14 यानी 14 दिन बाद।
पहली बैठक: क्या करेंगे, क्या कभी नहीं, मंज़ूरी कौन देगा।
बूथ-वार पुराने नतीजे, सर्वे, मुद्दे, विरोधी और मीडिया की जाँच।
जाँच से लिखित रणनीति: संदेश, वोटर समूह, कैलेंडर, बजट, जोखिम।
पेज, विज्ञापन खाता, SMS रजिस्ट्रेशन, डैशबोर्ड, मंज़ूर पोस्ट, पूरा अभ्यास।
Day 16 लॉन्च, फिर हर सेवा तय रूटीन पर।
हर बूथ पर ट्रेनिंग पाया प्रभारी; समर्थकों से घर-घर संपर्क।
आख़िरी 48 घंटे प्रचार बंद; मतदान के दिन कंट्रोल रूम।
बूथ-वार अनुमान बनाम असली नतीजा; क्या चला, क्या नहीं, क्यों।
हर पड़ाव के अंत में जाँच — काम पक्का हो, तभी अगला क़दम।
पहली बैठक: क्या करेंगे, क्या कभी नहीं, मंज़ूरी कौन देगा।
बूथ-वार पुराने नतीजे, सर्वे, मुद्दे, विरोधी और मीडिया की जाँच।
जाँच से लिखित रणनीति: संदेश, वोटर समूह, कैलेंडर, बजट, जोखिम।
पेज, विज्ञापन खाता, SMS रजिस्ट्रेशन, डैशबोर्ड, मंज़ूर पोस्ट, पूरा अभ्यास।
Day 16 लॉन्च, फिर हर सेवा तय रूटीन पर।
हर बूथ पर ट्रेनिंग पाया प्रभारी; समर्थकों से घर-घर संपर्क।
आख़िरी 48 घंटे प्रचार बंद; मतदान के दिन कंट्रोल रूम।
बूथ-वार अनुमान बनाम असली नतीजा; क्या चला, क्या नहीं, क्यों।
गिनती तब शुरू, जब ज़रूरी लॉगिन और काग़ज़ मिल जाएँ। Day 16 से पहले कुछ पब्लिक नहीं। विज्ञापन खाते या SMS रजिस्ट्रेशन में देर हो, तो लॉन्च बैकअप प्लान से।
बस कुछ काग़ज़, कुछ फ़ैसले और कुछ घंटे। काग़ज़ या रणनीति की मंज़ूरी में देर हो, तो लॉन्च उतने ही दिन आगे।
पहचान के काग़ज़, अधिकार-पत्र, पेजों की पहुँच, विज्ञापन भुगतान का तरीक़ा।
हर तरह के काम पर हाँ कहने वाला, और उसका बैकअप।
लक्ष्मण रेखा सूची, कौन क्या मंज़ूर करेगा, काम का दायरा, डेटा सहमति।
काम के सबूत, फ़ोटो, पुराने नतीजे, और नाज़ुक बातें खुलकर।
क़रीब डेढ़ घंटा; उम्मीदवार ख़ुद आएँ, सुझाव एक सूची में।
Day 13 तैयार पोस्ट-वीडियो पर हाँ-ना; Day 14 तक रणनीति पर।
अचानक फ़ोन नहीं, आख़िरी समय की भागदौड़ नहीं। आपके दो तय पड़ाव: शुक्रवार की रिपोर्ट और फ़ैसला-बैठक, जिसका दिन आपके साथ तय होता है।
पिछले आँकड़ों से इस हफ़्ते के ज़रूरी काम
पोस्ट, डिज़ाइन, वीडियो एडिट; हफ़्ते का प्रेस नोट
काम कहाँ अटका, विज्ञापन कैसे चल रहे
जो तय था, हुआ या नहीं; घर-घर संपर्क
एक पन्ने की आसान रिपोर्ट आपको
नुक्कड़ सभा, पदयात्रा; वीडियो उसी दिन
क़रीब आधा घंटा: हाँ, ना या बदलाव
एक दिन पहले फ़ैसलों की छोटी सूची आती है: हर बात पर हमारी सलाह और आख़िरी तारीख़। बैठक में आप हाँ, ना या बदलाव कहते हैं। उसी दिन फ़ैसलों का लिखित नोट मिलता है।
सूची में सिर्फ़ वही बातें आती हैं, जो आपको ही तय करनी हैं: जोखिम वाले काम, आपकी ओर से बयान, नई पोस्ट का बैच, कार्यक्रमों की तारीख़ें। रोज़ की आम पोस्ट के लिए फ़ोन नहीं आता।
रणनीति, आपकी ओर से बयान, आपके चेहरे या आवाज़ वाली चीज़ें और जोखिम वाला काम आपकी लिखित हाँ से। रोज़ की पोस्ट टीम और क्वालिटी जाँच से। चुप्पी “हाँ” नहीं।
मंज़ूर कैलेंडर की पोस्ट, त्योहार की बधाई, धन्यवाद
टीम और क्वालिटी जाँच, रोज़ पूछे बिनाप्रेस नोट, विज्ञापन, वीडियो, भाषण, लेख, पोस्टर
पूरी जाँच; चेहरे, आवाज़, बयान पर आपकी हाँविरोधी को जवाब, नाज़ुक मुद्दे, नए दावे, बल्क-मैसेज
पूरी जाँच, फिर आपकी लिखित मंज़ूरीतीन अलग लोग, तीन अलग नज़रें। एक से छूटी ग़लती अगला पकड़ लेता है। जाँच में फ़ेल चीज़ रुकती है, जल्दी हो तब भी।
हर आँकड़े का सबूत लगाता है; अपना काम ख़ुद पास नहीं करता।
वोटर की नज़र से पढ़कर सबूत मिलाता है; पास या वापस।
तथ्य, मंज़ूरी और नियम जाँचती है; ग़लती हो तो रोक।
आमने-सामने की मुलाक़ात, पोस्ट और विज्ञापन से कहीं ज़्यादा लोगों को वोट डालने ले जाती है। इसलिए आख़िरी महीने में ज़ोर बूथ और निजी संपर्क पर। आपको रोज़ शाम रिपोर्ट।
शायद घर बैठने वाले समर्थकों से मिलना, फ़ोन करना।
E-27 सेटीम हर समय तैयार; सबूत से जवाब, आपकी जल्दी लिखित हाँ से।
E-20 सेट्रेनिंग-टेस्ट पास बूथ प्रभारी और एक बैकअप, सामान के साथ।
E-15 तकपूरा अभ्यास, ताकि मतदान के दिन कुछ भी नया न हो।
E-7 सेआख़िरी 48 घंटे से पहले हर पोस्ट, विज्ञापन, SMS बंद; लिखित जाँच।
E-2हर बूथ से हर घंटे वोटिंग का हाल। कम वोटिंग पर फ़ोन, क़ानून के दायरे में समर्थकों को याद। दोपहर में आपको छोटा नोट; गड़बड़ी के सबूत आपके वकील को।
नतीजे के बाद क़रीब दो हफ़्ते में पूरा हिसाब। अच्छा और कमज़ोर, दोनों ईमानदारी से लिखा जाता है। सब कुछ आपको सौंपा जाता है।
नतीजा बनाम अनुमान, क्या चला, क्या नहीं, आगे की सलाह; संस्थापक ख़ुद समझाते हैं।
पेज, YouTube, WhatsApp, वेबसाइट, विज्ञापन खाता; पासवर्ड बदले, हमारी पहुँच ख़त्म।
सारी पोस्ट-वीडियो, सबूत की फ़ाइलें और सारी रिपोर्टें आपको।
सहमति के हिसाब से: आपको वापस, मिटाया, या सिर्फ़ बिना नाम के कुल आँकड़े।
क्या, कब, कैसे और किसने मिटाया, किसने जाँचा: सब लिखकर।
क्या-क्या सौंपा, सब लिखित; आप और हम दोनों दस्तख़त करते हैं।
सच और सबूत? लक्ष्मण रेखा के अंदर? चुनाव और प्लेटफ़ॉर्म के नियम? सही मंज़ूरी? एक भी जवाब “नहीं” या “पता नहीं”, तो नहीं छपता।
पोस्ट, विज्ञापन, SMS, कॉल, घर-घर प्रचार सब बंद; पहले से रोककर लिखित जाँच।
धर्म-जाति पर बाँटना, सरकारी गाड़ी, वोट के बदले पैसा: कभी नहीं। नियम आपके वकील से पक्के।
उसका पब्लिक रिकॉर्ड और काम, सबूत के साथ; परिवार या निजी जीवन पर हमला नहीं।
DLT रजिस्ट्रेशन, सिर्फ़ सहमति वाले नंबर; ख़रीदे नंबर कभी नहीं, बंद कराने का आसान रास्ता।
नक़ली ID, बॉट या किसी की नक़ल कभी नहीं; समर्थक अपने असली अकाउंट से।
इजाज़त से ही डेटा, उतना ही जितना काम में ज़रूरी; अंत में लौटाया या मिटाया।
हमारे काम करने के तरीके पर आम सवाल।
नहीं। सबूत साथ-साथ तैयार रहते हैं, इसलिए जाँच जल्दी होती है। ग़लत योजना पर पैसा लगने से पहले रुकना, छपी ग़लती सुधारने से कहीं सस्ता है।
नहीं। बार-बार होने वाले काम तकनीक से जल्दी होते हैं। पर फ़ैसले, सच की जाँच और लोगों से रिश्ते अनुभवी लोग ही सँभालते हैं।
आपको पब्लिक ग़लती से बचाने के लिए। बनाने वाले के बाद उसका सीनियर, फिर अलग क्वालिटी जाँच। जाँच में फ़ेल काम रुक जाता है। छपने से पहले पकड़ी ग़लती ही आपका बचाव है।
नहीं। शुरुआत में ही लिखकर तय होता है कि कौन-सा काम कौन मंज़ूर करेगा, और हर एक का बैकअप कौन होगा। इसलिए फ़ैसले अटकते नहीं।
नहीं। रोज़ का काम पहले से मंज़ूर पोस्ट-वीडियो से चलता रहता है। बाक़ी फ़ैसले हफ़्ते की तय बैठक में, या आपके बैकअप व्यक्ति से होते हैं। जोखिम वाला काम हाँ मिलने तक रुका रहता है।
हाँ। छोटे-बड़े हर अभियान में वही चरण चलते हैं। छोटे अभियान में हर क़दम हल्का होता है, पर कोई चरण छोड़ा नहीं जाता।
फ़ॉर्म भरें — पहली बातचीत और सीट विश्लेषण मुफ़्त है। उसके बाद आप तय करें।
चेतक PR कंसल्टेंसी — उत्तर प्रदेश के विधानसभा और ज़िला पंचायत प्रत्याशियों के लिए चुनावी रणनीति, प्रचार और पॉलिटिकल PR। हर बूथ तक, आपकी जीत तक।
चुनाव की तैयारी पर बात करनी है? WhatsApp करें — हमारी टीम सुबह 9 से रात 8 बजे के बीच 1–2 घंटे में जवाब देती है।
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